सबसे तेज खबर/ शिलाई
जिला सिरमौर के अधिकांश गिरिपार क्षेत्र में इन दिनों ग्रामीण स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिताओं का सीजन पूरे जोर-शोर से चल रहा है। हर वर्ष की भांति इस बार भी विभिन्न गांवों में टूर्नामेंट आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें युवाओं की भारी भागीदारी देखी जा रही है। खेल को स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक माना जाता है, जिससे शरीर निरोगी और सुदृढ़ बना रहता है। हालांकि, आगामी वार्षिक परीक्षाओं के मद्देनजर इस समय आयोजित हो रही क्रिकेट प्रतियोगिताओं को लेकर समाज के बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों ने चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि परीक्षाओं से ठीक पहले चल रहे इन टूर्नामेंटों का असर छात्रों की पढ़ाई पर विपरीत पड़ रहा है। समाजसेवी एवं स्वतंत्र लेखक ठाकुर हेमराज राणा ने ‘सबसे तेज खबर’ से विशेष बातचीत में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिकेट को लेकर युवाओं में विशेष दीवानगी देखी जाती है। कई छात्र, जो शहरों में पढ़ाई कर रहे हैं, वे भी मीलों दूर से गांवों में चल रही प्रतियोगिताओं में भाग लेने पहुंचते हैं और कई दिनों तक वहीं रुकते हैं। इससे उनका कीमती अध्ययन समय प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा कि जिन गांवों में कई दिनों तक क्रिकेट प्रतियोगिताएं चलती हैं, वहां सैकड़ों की संख्या में दर्शक जुटते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूल के छात्र भी शामिल होते हैं। गांव का वातावरण पूरी तरह खेलमय हो जाता है, जिसका असर पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है। विशेषकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। ठाकुर हेमराज राणा ने आयोजकों और बुद्धिजीवी वर्ग से विनम्र अपील की है कि ग्रामीण क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन वार्षिक परीक्षाओं से कम से कम एक या डेढ़ माह पूर्व अथवा परीक्षाओं के उपरांत किया जाए। उनका कहना है कि यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है और समय में थोड़ा परिवर्तन करके खेल और शिक्षा के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
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