सबसे तेज खबर/ नाहन
डॉ. वाई. एस. परमार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नाहन के भूगोल विभाग द्वारा 23 फरवरी 2026 को “हिमालयी पर्यावरणीय मुद्दे और आपदा जोखिम: बहुविषयक दृष्टिकोण” विषय पर एक ऐतिहासिक वर्चुअल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। महाविद्यालय का यह पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन न केवल संस्थान के लिए बल्कि पूरे सिरमौर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो शैक्षणिक, वैज्ञानिक और नीति निर्धारण समुदायों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। सम्मेलन में लगभग 400 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें शिक्षक, शोधार्थी, पेशेवर और विद्यार्थी भारत के विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से भाग लेंगे। यह आयोजन बहुविषयक संवाद को प्रोत्साहित करने और हिमालयी पर्यावरण तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगा। इस सम्मेलन में अमेरिका की NASA सहित कनाडा, इक्वाडोर, जर्मनी और थाईलैंड के प्रतिष्ठित वर्चुअल वक्ताओं के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), भारतीय मौसम विभाग (IMD), सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब के विशेषज्ञ, CISF अधिकारी तथा एवरेस्ट शिखरारोहियों जैसे उच्च-ऊंचाई विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। वे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों और अनुकूलन रणनीतियों पर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, हिमनद व भौगोलिक प्रणालियाँ, जल सुरक्षा, चरम मौसम, पर्यावरणीय जोखिम, भूस्खलन, भूकंपीय खतरे, ग्लेशियल झील विस्फोट, आपदा न्यूनीकरण रणनीतियाँ, जैव विविधता संरक्षण, संसाधन प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी, पारंपरिक ज्ञान, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियाँ, नीति नियोजन और सतत विकास जैसे समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श होगा। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वी. के. शुक्ला ने कहा कि यह सम्मेलन कॉलेज और जिले के लिए ऐतिहासिक पहल है, जो विशेषज्ञों, विद्वानों और छात्रों को पर्यावरणीय और आपदा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने का मंच देगा। आयोजन सचिव डॉ. जगदीश चंद ने इसे ज्ञान आदान-प्रदान और शोध सहयोग को बढ़ावा देने वाला कदम बताया, जबकि संयुक्त आयोजक सचिव डॉ. जगपाल सिंह तोमर ने कहा कि इससे सतत विकास, आपदा लचीलापन और सामुदायिक भागीदारी को मजबूती मिलेगी। सम्मेलन का शुभारंभ 23 फरवरी को सुबह 9 बजे होगा, जिसमें मुख्य भाषण, तकनीकी प्रस्तुतियाँ, पैनल चर्चाएँ और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
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