सबसे तेज खबर/ राजगढ़

कटोली-बधोरली क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिर जल्द ही एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। मंदिर में स्थापित पत्थर का शिवलिंग आदि कालीन और पाषाण युग का प्रतीत होता है। स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बन चुके इस मंदिर में हाल ही में एकादश दिवसीय शिव महापुराण कथा, विशाल हवन यज्ञ और भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वर्षों पहले यह स्थान घने जंगल और झाड़ियों से घिरा हुआ था। लोग कभी-कभार यहां जल अर्पित करने आते थे।


उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में जंगल में आग लगने के बाद यह स्थान साफ हुआ और लोगों का आना-जाना बढ़ने लगा। इसके बाद ग्रामीणों की आस्था और सक्रियता से मंदिर के विकास की नींव पड़ी। वर्ष 2015 में यहां खुदाई करवाई गई, जिसमें लगभग साढ़े चार फुट गहरा प्राचीन हवन कुंड प्राप्त हुआ। साथ ही कई टूटी-फूटी एवं कुछ सुरक्षित मूर्तियां भी मिलीं। सुरक्षित मूर्तियों को विधिवत प्राण प्रतिष्ठा के साथ शिव परिवार सहित मंदिर में स्थापित किया गया। अब यह मंदिर चार-पांच गांवों का मुख्य धार्मिक स्थल बन चुका है। मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष एकादश दिवसीय शिव महापुराण का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष दशम शिव महापुराण का आयोजन भव्य रूप से संपन्न हुआ, जिसका समापन विशाल हवन यज्ञ और भंडारे के साथ किया गया।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यहां धार्मिक अनुष्ठानों के लिए एक बड़ा हाल भी निर्मित कर दिया गया है। मंदिर तक सड़क का निर्माण भी पूर्ण हो चुका है। मंदिर परिसर में शिवलिंग के साथ काली माता का स्थान भी मौजूद है, जिसका शीघ्र जीर्णोद्धार प्रस्तावित है। भविष्य में यहां एक विशाल शिव प्रतिमा की स्थापना की भी योजना बनाई जा रही है, जिससे यह स्थल और अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा। मंदिर कमेटी के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग पत्थर का है और पाषाण युग का प्रतीत होता है। संभव है कि यह स्वयंभू शिवलिंग हो। शिवलिंग से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है, केवल मंदिर निर्माण कर शिव परिवार की स्थापना की गई है।


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