सबसे तेज खबर/ शिलाई (नीलम ठाकुर)
हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में आस्था और संकल्प की मिसाल पेश करते हुए सिरमौर जिला की एक युवती ने अपने वचन को निभाने के लिए कठिन पहाड़ी रास्तों पर नंगे पांव पदयात्रा कर समाज को प्रेरित किया है। श्री रेणुका जी क्षेत्र के चांदनी गांव की करुणा शर्मा की यह यात्रा इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वर्गीय मेला राम शर्मा की पुत्री करुणा शर्मा ने कठिन समय में मन ही मन एक संकल्प लिया था कि यदि उनकी मनोकामना पूर्ण होगी, तो वह पैदल और नंगे पांव चलकर चालदा महासू महाराज के दरबार में शीश नवाएंगी। जब उनकी मुराद पूरी हुई, तो उन्होंने बिना देर किए अपने वचन को निभाने का निर्णय लिया। 13 फरवरी की सुबह करीब 8 बजे, सर्द हवाओं के बीच करुणा ने चांदनी गांव से पदयात्रा शुरू की। बिना किसी वाहन या सहारे के पथरीले और दुर्गम रास्तों पर चलते हुए उन्होंने पहले दिन लगभग 10 घंटे की यात्रा कर शाम 6 बजे कफोटा पहुंचकर विश्राम किया।
अगले दिन 14 फरवरी की सुबह उन्होंने फिर यात्रा आरंभ की और शाम करीब 6 बजे पश्मी गांव स्थित चालदा महासू महाराज के दरबार में पहुंचकर दर्शन किए। वहां पहुंचते ही उनकी आंखों में थकान नहीं बल्कि कृतज्ञता के आंसू थे। सबसे तेज़ खबर से बातचीत में करुणा ने बताया कि यह यात्रा उनके संकल्प और अटूट विश्वास से जुड़ी थी। उनका कहना था कि जब ईश्वर हमारी पुकार सुनते हैं, तो हमें भी अपना वचन श्रद्धा के साथ निभाना चाहिए। कठिन चढ़ाई, कंकरीले रास्ते और कड़ाके की ठंड भी उनके कदमों को डिगा नहीं सकी। क्षेत्र के लोगों ने उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और भक्ति की सराहना की है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि आधुनिक समय में इस प्रकार की कठिन और निस्वार्थ श्रद्धा विरले ही देखने को मिलती है। करुणा शर्मा की यह पदयात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत विश्वास की परीक्षा थी, बल्कि समाज के लिए भी संदेश है कि आस्था केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म, त्याग और दृढ़ निश्चय में दिखाई देती है।
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