राजगढ़ नागरिक चिकित्सालय में डॉक्टरों की भारी कमी: आधे पद खाली होने से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था…
सबसे तेज खबर/ सिरमौर
राजगढ़ नागरिक चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाएं इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही हैं। क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण आम जनता को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को मजबूरन सोलन, शिमला और चंडीगढ़ जैसे दूरस्थ बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में कुल 20 स्वीकृत चिकित्सक पदों में से 10 पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। मौजूदा समय में यहां केवल तीन विशेषज्ञ डॉक्टर कार्यरत हैं, जिनमें महिला रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और नेत्र रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।
शेष महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के चलते मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। राजगढ़ नागरिक चिकित्सालय न केवल राजगढ़ उपमंडल, बल्कि रैणुका विधानसभा क्षेत्र के हरिपूरधार, नौहराधार, लाना चेता तथा चौपाल विधानसभा क्षेत्र के कुपवी जैसे दुर्गम इलाकों के लिए भी सबसे नजदीकी बड़ा सरकारी अस्पताल है। इन दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचते हैं, लेकिन स्टाफ और सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें आगे भेजना पड़ता है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां कई गुना बढ़ जाती हैं।
ब्लड बैंक आज भी सपना
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में ब्लड बैंक की स्थापना की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके अलावा कई जरूरी जांच सुविधाएं और आधुनिक उपचार व्यवस्थाएं भी यहां उपलब्ध नहीं हैं, जिससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
इलाज में देरी बन रही जानलेवा
स्थानीय नागरिकों के अनुसार गंभीर बीमारियों और हादसों के मामलों में इलाज में देरी कई बार जानलेवा साबित हो रही है। बाहर इलाज के लिए जाने में समय और धन दोनों खर्च होते हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है। प्राकृतिक आपदाओं, आगजनी या सड़क हादसों के दौरान स्थिति और भी भयावह हो जाती है, क्योंकि गंभीर रूप से घायलों को समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पाता।
खंड स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उपासना शर्मा का कहना है कि अस्पताल में रिक्त पदों की जानकारी नियमित रूप से उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। स्टाफ की कमी से सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, लेकिन विभाग स्तर पर सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास लगातार जारी है।राजगढ़ उपमंडल के लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यदि जल्द ही डॉक्टरों के रिक्त पद नहीं भरे गए और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो जनता को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि सरकार को कागजी घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करनी होगी। अब यह देखना बाकी है कि प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग राजगढ़ नागरिक चिकित्सालय की बदहाल स्थिति सुधारने के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं, या फिर जनता को अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
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