सबसे तेज खबर/ पांवटा साहिब (नीलम ठाकुर)

आंजभोज क्षेत्र का टोंरु गांव अब सामाजिक सुधार की मिसाल बनकर उभरा है। गांव के बुजुर्गों, युवाओं और मातृशक्ति ने एकजुट होकर गांवहित में कई ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी सामाजिक निर्णय लिए हैं, जिनका एक लिखित प्रारूप भी तैयार किया गया है। इन निर्णयों का उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाना तथा गांव में समानता, सादगी और भाईचारे को बढ़ावा देना है। ग्राम सभा में लिए गए निर्णयों के अनुसार अब गांव में होने वाली ‘पलटोज पार्टी’ को सीमित किया जाएगा। इसमें केवल अपने बेड़े और गांव के प्रमुख लोगों को ही आमंत्रित किया जाएगा। वहीं ‘दस उठन’ की परंपरा अब केवल बड़े पुत्र के जन्म पर ही आयोजित की जाएगी, जबकि इसके बाद जन्म लेने वाले पुत्र या पुत्री के अवसर पर केवल चार-पांच निकटतम परिवारों को ही आमंत्रित किया जाएगा।


इसके अलावा गांव में शादी-विवाह के दौरान शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही गांव में शराब की बिक्री पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। महिलाओं को दिए जाने वाले घी, शक्कर, चीनी, सिक्के, कपड़े, बर्तन अथवा किसी भी प्रकार के उपहार देने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। गांव में महिलाओं और पुरुषों को दिए जाने वाले दिन के ‘टोलूआ’ का बकरा देने की परंपरा भी अब समाप्त कर दी गई है। डीजे कार्यक्रम केवल एक दिन, वह भी सीमित और नियंत्रित रूप में, विवाह के मुख्य दिन ही आयोजित किया जाएगा। शोक एवं बरसी से जुड़े कार्यक्रम भी अब केवल बेड़े तक सीमित रहेंगे। 13 दिन का शोक रखने वाले परिवार के अतिरिक्त बेड़े से केवल दो-तीन लोगों को ही आमंत्रित किया जाएगा। गांव के बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा लिए गए ये निर्णय न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे, बल्कि आंजभोज क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगे। यह पहल समाज कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


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