शिलाई में जनविरोधी नीतियों के खिलाफ गरजा मजदूर वर्ग, सीटू और किसान यूनियन की रोष रैली में सरकार को सौंपा गया मांग पत्र..

सबसे तेज खबर/शिलाई

संयुक्त ट्रेड यूनियन के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर मंगलवार को सीटू और किसान यूनियन शिलाई इकाई द्वारा केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों व मजदूर विरोधी कानूनों के खिलाफ एक जोरदार रोष रैली निकाली गई। रैली का आगाज़ शिलाई अस्पताल से हुआ, जो नारेबाजी करते हुए उपमंडल कार्यालय तक पहुंची। वहाँ धरना प्रदर्शन कर एसडीएम के माध्यम से प्रदेश व केंद्र सरकार को मांग पत्र सौंपा गया।सीटू शिलाई के अध्यक्ष अभय धामटा और सचिव अधिवक्ता बलदेव कॉमरेड ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा पारित नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को छीनने का प्रयास हैं। यदि ये “काले कानून” वापस नहीं लिए गए तो देशव्यापी आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजीकरण के ज़रिए अपने कारोबारी मित्रों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आम जन को शोषण की ओर धकेल रही है। आंगनबाड़ी वर्करों ने सुनाई व्यथा….. आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की अध्यक्षा ने बताया कि वर्कर लंबे समय से शोषण का शिकार हो रही हैं। वेतन महीनों से नहीं मिल रहा, मोबाइल उपकरण घटिया हैं और सरकार इंटरनेट भत्ता तक नहीं दे रही। उन्होंने आंगनबाड़ी को प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में मान्यता देने और कार्यकर्ताओं के वेतन में समानता की मांग उठाई।एम्बुलेंस कर्मचारियों ने जताया आक्रोश…108 और 103 एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन ने कहा कि मेडस्वान फाउंडेशन और एनएचएम के तहत काम कर रहे कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। ओवरटाइम के बावजूद कोई अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जा रहा, जो उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना है।मिड डे मील वर्कर्स ने वेतन समानता की उठाई मांगमिड डे मील वर्कर यूनियन ने कहा कि सरकार को हरियाणा की तर्ज पर उचित वेतन देना चाहिए। 25 बच्चों की अनिवार्यता को समाप्त कर हर विद्यालय में कम से कम दो कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारी संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार मजदूरों की आवाज़ को अनसुना करती रही, तो यह आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।


Discover more from सबसे तेज़ खबर

Subscribe to get the latest posts sent to your email.