सबसे तेज खबर/शिमला..
“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का वास होता है”—यह कहावत आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है। देशभर में छात्रों और युवाओं के मानसिक एवं शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए शारीरिक शिक्षा को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी संदर्भ में हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से लंबित प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा एक बार फिर गंभीरता से उठाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में पिछले एक दशक से शिक्षा विभाग में शारीरिक शिक्षकों की नई भर्तियां नहीं हुई हैं। भर्तियों में विलंब के पीछे विभिन्न प्रशासनिक कारणों के साथ-साथ माननीय उच्च न्यायालय में लंबित मामलों को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन जनहित में यह मांग उठ रही है कि सरकार न्यायालय में अपनी बात को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करे और युवाओं के हित में शीघ्र निर्णय सुनिश्चित करे। प्रदेश के प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों पूर्व डिग्री व डिप्लोमा प्राप्त कर लाखों रुपए और कीमती समय निवेश किया, इस आशा के साथ कि उन्हें जल्द अवसर मिलेगा प्रदेश के स्कूलों में सेवाएं देने का। लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई शिक्षक बढ़ती उम्र और बेरोजगारी के बीच मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं, फिर भी हार नहीं मानी और वे लगातार सरकार से नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक गंभीर है, जहां स्कूलों में शारीरिक शिक्षक तो दूर, खेल सामग्री और प्रशिक्षण की भी कमी देखी जाती है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि सरकार योग, खेल और अनुशासन आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति को प्राथमिकता दे। प्रशिक्षित शिक्षकों का मानना है कि योग दिवस जैसे आयोजनों का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है जब स्कूलों में योग्य और समर्पित शारीरिक शिक्षक मौजूद हों, जो छात्रों को दिशा दे सकें, उनका मार्गदर्शन कर सकें, और उनमें अनुशासन व खेल भावना का संचार कर सकें। यह न केवल छात्रों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि उन्हें खेलों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के लिए भी सक्षम बनाएगा। प्रदेश सरकार से अनुरोध है कि इस महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय ले, जिससे न केवल युवाओं का भविष्य संवरे, बल्कि वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हजारों प्रशिक्षित शिक्षकों को भी न्याय मिल सके।
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